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माता गिरिजा महोत्सव आठवें दिन, बगासपुर का नाम माता गिरजा धाम करने उठी मांग

माँ ने हमें ध्रुव जी का चरित्र सुनाया था
                -पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज
       माँ के अनेक संस्मरण हो सकते हैं पर हम अधिक उनमें न जाना चाहेंगे। हम नहीं चाहते कि भागवत जी की कथा में कोई आत्मकथा आ जाए, पर माताजी के सन्दर्भ में कुछ सुनाने के आप लोगों के आग्रह को ध्यान में रखकर हम वह प्रसंग सुनाते हैं जो भागवत जी से ही सम्बंधित है। पूज्या माता जी ने हमें ध्रुव जी का चरित्र सुनाया था, हमें याद है कि हम वह सुनकर रो पड़े थें।
        पूज्य महाराजश्री ने विस्तार से बताया कि किस तरह विमाताओं ने ध्रुव और राम जी को कष्ट दिये थें।

भारतीय संस्कृति में माता का सर्वोच्च स्थान
                             
       हम जब किसी का नाम लेते हैं तो माता का स्मरण पहले करते हैं। सीताराम, राधेश्याम और गौरीशंकर आदि नाम इसके उदाहरण हैं। यह इसलिए क्योंकि भारतीय संस्कृति में माता को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त है।
       उक्त उद्गार पूज्यपाद ज्योतिष् एवं द्वारिकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने ग्राम बगासपुर में आयोजित 'माता गिरिजा महामहोत्सव' के आठवें दिन के प्रवचन में व्यक्त किये।
             उन्होंने आगे कहा कि भगवान् आदि शंकराचार्य जी जो कि सनातन शास्त्रों के परम आराधक थे, उन्होंने भी मातृतत्व को सर्वश्रेष्ठ माना है। उन्होंने तो एक जगह पर श्रीकृष्ण को भी अपनी माँ के रूप में देखा हैं।


माँ ही है जो बेटे में दोष नहीं देखती
          पूज्य शंकराचार्य जी ने आगे बताया कि संसार मे लोग स्वयं तो अपराध करते हैं पर वही दूसरा कर दे तो उसे सहन नहीं करते हैं। केवल माँ ही एक है जो बेटे के दोष को नहीं देखती। गाय को जब बछड़ा होता है, तब उसके शरीर में गन्दगी लगी रहती है। वह यह नहीं कहती कि तुम नहा धोकर आओ तब मैं तुम्हें चाटकर प्यार दिखाऊँगी। इसलिए अनेक भक्त परमात्मा की उपासना देवी माँ के रूप में करते हैं। भगवान् आदि शंकराचार्य कहते हैं कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कभी कुमाता नहीं हो सकती।

कलयुगी बेटों ने माँ का महत्व किया कम
 
         पूज्य शंकराचार्य जी ने कलयुगी बेटों को माता का महत्व कम करने वाला बताते हुए कहा कि कलियुगी बेटे माँ के महत्व को नहीं समझते। तुलसीदास जी ने कहा है कि कलियुग में बेटे पत्नी के आने के बाद माता का निरादर करेंगे। पूज्य महाराज श्री ने मार्मिक कथानकों के माध्यम से आज के बेटों की कथा सुनाई और कहा कि ऐसे बेटे कभी सुख-शान्ति से नही रह सकते। पूज्य महाराजश्री ने प्रश्न उठाया कि क्या कोई बेटा गर्भ में नौ महीने रहने का किराया देकर मातृ ऋण से उऋण हो सकता है?

शंकराचार्य जी हैं सनातनधर्म के सजग प्रहरी
       
        नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि 700 किमी. की यात्रा कर मैं केवल इस कार्यक्रम में भाग लेने आया हूँ। इस तरह के कार्यक्रमों से ही सनातन धर्म सुरक्षित है, और उससे सत्प्रेरणायें प्राप्त होती हैं। उन्होंने तामसिक भोजन से लोगो को दूर रहने की सलाह दी और कहा कि तामसी भोजन हमारे तमोगुण को बढ़ाता है जो हमारे दुःख का कारण बनता है।
          उन्होंने कार्यक्रम में सम्मिलित होने को अपना सौभाग्य बताया और पूज्य महाराजश्री के चरणों मे अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त की और कहा कि वे स्वतन्त्रता संग्राम से लेकर आजतक देश, समाज और धर्म की रक्षा के लिए सर्वदा सन्नद्ध दिखाई देते हैं।

बगासपुर का नाम 'माता गिरिजा धाम' करने की मांग

                 बगासपुर गाँव के सरपंच श्री प्रेमशंकर पटेल 'शंकू' ने ग्रामवासियों की ओर से सभा मे बगासपुर गाँव का नाम बदलकर 'माता गिरिजाधाम' करने, ग्राम के दोनों ओर सड़क पर 'माता गिरिजा धाम' द्वार स्थापित करने और जोंक तालाब को 'माता गिरिजा सरोवर' नामित कर सुन्दरीकरण करने का प्रस्ताव रखा।

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