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टूटे 'A' मोनोग्राम ने खोला हत्या का राज: हाईवा से कुचलकर सड़क हादसा दिखाने की साजिश का पर्दाफाश


एक माह पहले रची गई थी खौफनाक साजिश, दो हाईवा डंपरों से वारदात को दिया गया अंजाम; मुख्य षड्यंत्रकारी समेत 8 आरोपी गिरफ्तार, हत्या में प्रयुक्त हाईवा, थार, फॉर्च्यूनर और मोबाइल जब्त

न्यूज़ एक्सप्रेस18- नरसिंहपुर:- 26/07/2026- 19 जुलाई को थाना सुआतला क्षेत्र के इंद्रानगर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई भीषण घटना, जिसे शुरुआत में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, आखिरकार एक सुनियोजित हत्या की साजिश निकली। नरसिंहपुर पुलिस ने महज एक टूटे हुए अंग्रेजी अक्षर "A" (मोनोग्राम) के सहारे पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक राजेन्द्र पटैल की हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने के लिए पहले से योजना बनाकर दो हाईवा डंपरों की तैनाती की गई थी। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि हत्या में प्रयुक्त हाईवा, महिंद्रा थार, टोयोटा फॉर्च्यूनर और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं।

घटना 19 जुलाई की है, जब तेज रफ्तार हाईवा ने सड़क किनारे खड़े 6-7 लोगों को कुचल दिया था। हादसे में राजेन्द्र पटैल की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य घायलों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एक व्यक्ति अभी भी उपचाररत है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना स्वयं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ रात में घटनास्थल पहुंचे और करीब चार से पांच घंटे तक घटनास्थल, आसपास के क्षेत्र और स्थानीय लोगों से जानकारी लेकर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।

एक छोटा सुराग बना पूरी जांच का टर्निंग प्वाइंट

शुरुआती जांच में मामला सामान्य सड़क दुर्घटना जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन घटनास्थल के सूक्ष्म निरीक्षण के दौरान पुलिस को सड़क पर पड़ा अंग्रेजी अक्षर "A" का टूटा हुआ मोनोग्राम मिला। पुलिस को संदेह हुआ कि यह टाटा कंपनी के किसी भारी वाहन का हिस्सा हो सकता है। इसी छोटे से सुराग ने पूरी विवेचना की दिशा बदल दी।

इसके बाद पुलिस ने शाहपुरा (जबलपुर) से लेकर घटनास्थल तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की घंटों फुटेज खंगाली। तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और अन्य तथ्यों का गहन विश्लेषण किया गया। लगातार तलाश के बाद घटना में प्रयुक्त हाईवा डंपर हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों में छिपा मिला, जिससे पुलिस को पूरे षड्यंत्र का सिरा हाथ लग गया।

पूछताछ में खुली एक माह पुरानी साजिश

जांच के दौरान संदेह के आधार पर राजा पटैल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। पुलिस के अनुसार मृतक राजेन्द्र पटेल और मुख्य आरोपी आनंद पटैल के बीच लंबे समय से विवाद और रंजिश चली आ रही थी। इसी रंजिश के चलते आनंद पटैल ने पहले से हत्या की योजना बनाई थी और राजा पटैल सहित अन्य सहयोगियों को मृतक की गतिविधियों पर नजर रखने तथा उसकी लोकेशन उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा था।

मोबाइल से भेजी गई लोकेशन बनी मौत का कारण

पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन राजा पटैल ने मोबाइल फोन के माध्यम से मृतक राजेन्द्र पटैल की सटीक लोकेशन और पहचान संबंधी जानकारी मुख्य आरोपी आनंद पटैल को भेजी। इसी सूचना के आधार पर पहले से तैयार बैठी टीम ने वारदात को अंजाम दिया।

दो हाईवा डंपरों से रची गई थी हत्या की रणनीति

जांच में खुलासा हुआ कि साजिश के तहत दो हाईवा डंपरों को अलग-अलग दिशा में पहले से तैनात किया गया था। एक हाईवा भोपाल की ओर जाने वाली लेन पर और दूसरा जबलपुर की ओर जाने वाली लेन पर खड़ा था, ताकि मृतक जिस दिशा में दिखाई दे, उसी हिसाब से हमला किया जा सके। जैसे ही मृतक की लोकेशन मिली, हाईवा से उसे और उसके साथियों को कुचल दिया गया और पूरी घटना को सड़क दुर्घटना साबित करने का प्रयास किया गया।

जंगलों में चला रातभर सर्च ऑपरेशन

साजिश का खुलासा होने के बाद पुलिस ने सबसे पहले भरत पटेल और अनिल पटेल को गिरफ्तार किया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद अन्य आरोपी जंगलों की ओर फरार हो गए। पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की सूचना के आधार पर पूरी रात जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। लगातार दबिश के बाद मुख्य आरोपी आनंद पटैल (लोधी), अनुज पटैल, अरविन्द पटैल, नरेन्द्र ठाकुर और अमित खरे सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपियों की भूमिका

पुलिस के अनुसार आनंद पटैल इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार और घटना में प्रयुक्त हाईवा का चालक था। अनुज पटैल वारदात के समय उसके साथ हाईवा में मौजूद था। राजा पटैल, अरविन्द पटैल और भरत पटेल ने मृतक की गतिविधियों और लोकेशन उपलब्ध कराई। अनिल पटैल एवं नरेन्द्र ठाकुर ने घटना के बाद आरोपियों को शरण और सहयोग दिया, जबकि अमित खरे पर घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने और साक्ष्य छिपाने संबंधी सलाह देने का आरोप है।

हाईवा, लग्जरी वाहन और मोबाइल जब्त

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हाईवा डंपर, काले रंग की महिंद्रा थार, सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर तथा वारदात में उपयोग किए गए मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं 105, 109(1), 103, 61(2)(क) एवं 249 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना जारी है।

इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका

इस बहुचर्चित और चुनौतीपूर्ण हत्याकांड के सफल खुलासे में एसडीओपी तेन्दूखेड़ा अभिनव मिश्रा, एसडीओपी नरसिंहपुर मनोज गुप्ता, उप पुलिस अधीक्षक उमेश तिवारी के नेतृत्व में निरीक्षक गौरव चाटे, किशोर वामनकर, प्रियंका केवट, उप निरीक्षक मनीष मरावी, आशीष बोपचे, सहायक उप निरीक्षक सुमित तिवारी सहित पुलिस टीम के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की सराहना करते हुए इसे तकनीकी विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और सूक्ष्म जांच का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

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