फुवारा चौक पर स्थायी प्रवेश द्वार निर्माण की मांग को लेकर नगर पालिका को सौंपा गया ज्ञापन
नरसिंहपुर/गोटेगांव:- (मोहन सिंह राजपूत) धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की पुण्यभूमि गोटेगांव नगर की पहचान को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नगरवासियों ने फुवारा चौक पर भव्य एवं स्थायी प्रवेश द्वार निर्माण की मांग को लेकर नगर पालिका को ज्ञापन सौंपा।
यह प्रवेश द्वार धार्मिक क्षेत्र झोतेश्वर परमहंसी गंगा आश्रम पहुंच मार्ग पर प्रस्तावित है, जो नगर की धार्मिक गरिमा का प्रतीक बनेगा। इसी मार्ग पर श्री श्री बाबाश्री का सत्य सरोवर आश्रम भी विद्यमान है।
नगरवासियों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की तपोभूमि परमहंसी गंगा आश्रम गोटेगांव नगर की आत्मा और पहचान है। पूज्य शंकराचार्य जी ने ही गोटेगांव को नया आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करते हुए इसे “श्रीधाम” की संज्ञा दी थी, जिसके कारण यह नगर आज देश-विदेश में श्रद्धा और आस्था के केंद्र के रूप में जाना जाता है। भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी माता का भव्य मंदिर परमहंसी गंगा आश्रम में स्थापित है, वहीं वर्तमान में द्वारिका पीठ के शांकराचार्य अविमुकतेश्वरानन्द सरस्वती एवं शारदा पीठ के शांकराचार्य सदानंद सरस्वती का श्रीधाम गोटेगाँव से गहरा लगवा है।
ज्ञापन सौंपने वालों में स्नेहलता श्रीवास्तव, अरविंद दुबे, रमाबाई, कमलाबाई, संजू श्रीवास्तव, राजू साहू, आरती साहू, मुकुंदी लाल बर्मन एवं नेहा रस्तोगी प्रमुख रूप से शामिल रहीं। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह प्रवेश द्वार केवल एक संरचना नहीं, बल्कि गोटेगांव की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक होगा।
नागरिकों ने बताया कि गोटेगांव नगर में प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं पर्यटक दर्शन हेतु आते हैं, किंतु नगर में प्रवेश करते समय कोई स्थायी एवं भव्य प्रवेश द्वार न होने से इसकी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं हो पाती। फुवारा चौक ऐसा प्रमुख स्थान है, जहाँ से झोतेश्वर परमहंसी गंगा आश्रम की ओर श्रद्धालुओं का आवागमन होता है, अतः यहां प्रवेश द्वार का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
नगरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से आग्रह किया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र ही फुवारा चौक पर आकर्षक, भव्य एवं स्थायी प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाए। इससे न केवल श्रद्धालुओं को दिशा-सूचक सुविधा मिलेगी, बल्कि नगर की सुंदरता, गरिमा और धार्मिक पहचान में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रवेश द्वार के निर्माण से गोटेगांव नगर एक सुस्पष्ट धार्मिक नगरी के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित होगा तथा आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी आध्यात्मिक विरासत पर गर्व करने का अवसर मिलेगा।
*श्रीधाम गोटेगांव की पहचान का प्रश्न*
धार्मिक नगरी केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और स्मृतियों से बनती है। गोटेगांव ऐसा ही एक नगर है, जिसकी आत्मा में अध्यात्म रचा-बसा है। ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की तपोभूमि परमहंसी गंगा आश्रम ने इस नगर को न केवल आध्यात्मिक ऊँचाई दी, बल्कि उसे “श्रीधाम” का नाम देकर गौरव से भी विभूषित किया। यह कोई सामान्य नाम नहीं, बल्कि गोटेगांव की धार्मिक पहचान और गौरव का प्रतीक है।
आज जब देश-विदेश से श्रद्धालु झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम के दर्शन हेतु यहाँ आते हैं, तब नगर में प्रवेश करते ही उसकी धार्मिक महत्ता का अनुभव होना चाहिए। किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि गोटेगांव जैसे पावन नगर में अभी तक कोई ऐसा भव्य और स्थायी प्रवेश द्वार नहीं है, जो आगंतुकों को यह अनुभूति करा सके कि वे एक साधारण नगर नहीं, बल्कि एक धार्मिक तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
फुवारा चौक, जो झोतेश्वर परमहंसी गंगा आश्रम का प्रमुख मार्ग है, आज भी अपनी पहचान के लिए प्रतीक्षारत है। नगरवासियों द्वारा यहां प्रवेश द्वार निर्माण की मांग केवल एक निर्माण कार्य की मांग नहीं है, बल्कि यह गोटेगांव की धार्मिक अस्मिता, सांस्कृतिक चेतना और जनभावनाओं की अभिव्यक्ति है। यह मांग नगर की आत्मा से उठी हुई आवाज है।
प्रवेश द्वार किसी नगर का मुख होता है। वही पहला दृश्य श्रद्धालु और आगंतुक के मन में नगर की छवि गढ़ता है। यदि श्रीधाम गोटेगांव की शुरुआत ही एक साधारण चौराहे से हो, तो उसकी आध्यात्मिक गरिमा स्वयं ही क्षीण होती प्रतीत होती है। एक आकर्षक, शास्त्रीय और स्थायी प्रवेश द्वार न केवल श्रद्धालुओं को दिशा देगा, बल्कि नगर की सांस्कृतिक गरिमा को भी प्रतिष्ठित करेगा।
अब यह दायित्व नगर पालिका और प्रशासन का है कि वे इस मांग को औपचारिक ज्ञापन समझकर न देखें, बल्कि इसे जनआस्था और धार्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करें। विकास केवल सड़क और भवन नहीं होता, बल्कि विरासत और पहचान का संरक्षण भी विकास का ही एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
यदि फुवारा चौक पर प्रवेश द्वार का निर्माण होता है, तो यह केवल एक संरचना नहीं होगी, बल्कि यह गोटेगांव के गौरवशाली अतीत, जीवंत वर्तमान और आध्यात्मिक भविष्य का प्रतीक बनेगी। श्रीधाम की यह पहचान आने वाली पीढ़ियों को भी यह स्मरण कराएगी कि वे एक ऐसी भूमि पर खड़े हैं, जहाँ तप, त्याग और साधना की परंपरा जीवित है।
आज आवश्यकता है कि प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करे और गोटेगांव को वह पहचान दे, जिसकी वह वर्षों से प्रतीक्षा कर रहा है। श्रीधाम गोटेगांव को प्रवेश द्वार नहीं, अपनी पहचान का द्वार चाहिए।
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