एमएसएमई के लिए बड़ा बदलाव: संसद से संशोधन विधेयक पारित, भुगतान में देरी पर कसेगा शिकंजा
एमएसएमई को कारोबार में आसानी, ऑनलाइन विवाद समाधान और समयबद्ध भुगतान की सुविधा; TReDS के जरिए बिल निपटाने पर जोर
नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद से पारित करा लिया है। लोकसभा ने इसे 7 अगस्त को मंजूरी दी, जबकि इससे पहले 3 अगस्त को राज्यसभा से विधेयक पारित हो चुका है। नए संशोधनों का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करना, कारोबार करना आसान बनाना और छोटे उद्यमों के भुगतान संबंधी विवादों का तेजी से समाधान करना है।
वर्ष 2006 में लागू हुए एमएसएमईडी अधिनियम को अब 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और कारोबारी परिस्थितियों में तेजी से बदलाव आया है। सरकार का कहना है कि इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिनियम में संशोधन किया गया है।
1.65 करोड़ से बढ़कर 9.16 करोड़ हुए पंजीकृत एमएसएमई
एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला माना जाता है। उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 1 अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9.16 करोड़ हो गई है। यह क्षेत्र देश में 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
संशोधन के बाद एमएसएमई की पहचान के लिए संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश के साथ-साथ कारोबार (टर्नओवर) को भी आधार बनाया गया है। वहीं उद्यम पंजीकरण पोर्टल को डिजिटल, नि:शुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी आधार दिया गया है।
भुगतान में देरी पर ऑनलाइन समाधान
एमएसएमई के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक खरीदारों से समय पर भुगतान नहीं मिलना है। संशोधन में इस समस्या से निपटने के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है।
यदि किसी डिक्री, पंचाट पुरस्कार या आदेश को निरस्त करने संबंधी आवेदन छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है तो अदालतों को संबंधित सूक्ष्म एवं लघु उद्यम आपूर्तिकर्ता को पुरस्कार राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश देना होगा।
विवादों के निपटारे की समय सीमा तय
संशोधित कानून में भुगतान विवादों के निपटारे के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। मध्यस्थता प्रक्रिया को पहली उपस्थिति की तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। मध्यस्थता समाप्त होने के बाद मामले को 30 दिनों के भीतर पंचाट के लिए भेजना होगा। इसके बाद दलीलें पूरी होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर पंचाट पुरस्कार जारी करना होगा।
बकाया राशि की वसूली में भी आसानी
अब सुविधा परिषद अथवा निर्धारित मध्यस्थता व्यवस्था के माध्यम से हुए समझौते या पंचाट पुरस्कार की राशि को भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किया जा सकेगा। इसके लिए जिला कलेक्टर, डिप्टी कमिश्नर अथवा अधिसूचित प्राधिकारी की मदद ली जा सकेगी। इससे एमएसएमई को लंबे समय तक भुगतान के लिए भटकने से राहत मिलने की उम्मीद है।
TReDS से तेज होगा भुगतान
एमएसएमई से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करने वाले सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को बिलों के निपटारे के लिए TReDS प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा।
TReDS के माध्यम से एमएसएमई अपने बिलों को समय से पहले डिस्काउंट कराकर कारोबार के लिए आवश्यक धनराशि प्राप्त कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर बिल डिस्काउंटिंग का कारोबार 2022-23 में 40 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
राज्यों को अधिक सुविधा परिषद बनाने का अधिकार
संशोधन के जरिए राज्यों को एक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) गठित करने की सुविधा दी गई है। इससे भुगतान संबंधी मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। राज्य सरकारें MSEFC से जुड़े नियम भी बना सकेंगी।
छोटे कारोबारियों को राहत, दंड व्यवस्था में बदलाव
संशोधन में कारोबारियों के लिए दंड व्यवस्था को भी सरल बनाया गया है। पहले कुछ मामलों में दोषसिद्धि और जुर्माने का प्रावधान था। अब कई प्रावधानों को गैर-आपराधिक बनाया गया है और चरणबद्ध नागरिक दंड की व्यवस्था की गई है।
गलत जानकारी देने पर पहली बार चेतावनी दी जाएगी, जबकि दूसरी और उसके बाद की घटनाओं पर दंड लगाया जाएगा। इसी तरह वार्षिक खातों में ब्याज सहित बकाया राशि का खुलासा नहीं करने पर भी पहले चेतावनी, फिर दंड और उसके बाद जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में कदम
केंद्र सरकार के अनुसार संशोधनों का उद्देश्य एमएसएमई को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और विस्तार योग्य बनाना है। इससे उद्यमों के औपचारिकरण, कारोबार के विस्तार, समय पर भुगतान और नियमों के अनुपालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि मजबूत एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन, समावेशी आर्थिक विकास और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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