मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम स्नान से रोके जाने पर बवाल, पुलिस व्यवहार से संत समाज आहत
न्यूज़ एक्सप्रेस18(मोहन सिंह राजपूत)-प्रयागराज:-सनातन आस्था के महापर्व मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को संगम स्नान के लिए जाते समय मेला प्रशासन और यूपी पुलिस द्वारा बीच रास्ते में ही रोक दिया गया। पुलिस के कथित कठोर, असंवेदनशील और अपमानजनक व्यवहार से आहत होकर शंकराचार्य जी बिना स्नान किए ही वापस लौट गए। इस घटना के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शंकराचार्य जी महाराज अपने शिष्यों और श्रद्धालुओं के साथ पूर्व निर्धारित एवं परंपरागत मार्ग से संगम की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान माघ मेला क्षेत्र में तैनात पुलिस बल ने उनका मार्ग अवरुद्ध कर दिया। संतों का आरोप है कि पुलिस ने किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था या सम्मानजनक संवाद किए बिना ही बल प्रयोग शुरू कर दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं के साथ धक्का-मुक्की की गई और अपशब्दों का प्रयोग भी किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता के आरोप
संत समाज का कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया, उन्हें जबरन पीछे धकेला गया। कुछ भक्तों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे धार्मिक वातावरण में भय और असंतोष फैल गया। यह घटना उस समय हुई जब पूरा मेला क्षेत्र भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा हुआ था।
40 वर्षों से चली आ रही परंपरा टूटी
गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज पिछले लगभग 40 वर्षों से मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर निरंतर संगम स्नान करते आ रहे हैं। यह पहली बार है जब प्रशासनिक अड़चनों के चलते वे स्नान से वंचित रह गए। संत समाज इसे केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि सनातन धर्म की परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा आघात मान रहा है।
प्रशासन पर शंकराचार्य का तीखा प्रहार
घटना के बाद शंकराचार्य जी महाराज ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे कोई अपराध करने नहीं जा रहे थे, बल्कि धर्मसम्मत और परंपरागत संगम स्नान के लिए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि जब साधु-संत और श्रद्धालु ही सुरक्षित और सम्मानित नहीं हैं, तो ऐसे कलुषित वातावरण में स्नान करना उन्हें उचित नहीं लगा। शंकराचार्य जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को इस दुर्व्यवहार का उत्तर देना होगा, क्योंकि यह सनातन परंपराओं के सम्मान से जुड़ा विषय है।
योगी सरकार और मेला प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद योगी सरकार और मेला प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रद्धालुओं और संतों का कहना है कि जिस प्रदेश को धर्म, आस्था और संत परंपरा का केंद्र माना जाता है, वहां एक जगद्गुरु के साथ इस प्रकार का व्यवहार निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के सफल प्रबंधन का दावा करने वाला प्रशासन एक शंकराचार्य के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं कर सका—यह सवाल अब आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
संत समाज में रोष, संवाद की मांग
घटना के बाद संत समाज में भारी रोष है और कई संत संगठनों ने प्रशासन से स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है। संतों का कहना है कि यदि इस मामले में शीघ्र संवाद और समाधान नहीं किया गया, तो यह टकराव और गहराता जाएगा। फिलहाल यह घटना संत समाज और प्रशासन के बीच एक गहरी खाई पैदा करती नजर आ रही है।

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