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होशंगाबाद - चल रहा है शिव आराधना मय पवित्र श्रवण मास


होशंगाबाद -(मनमोहन राजपूत) - श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव इस माह में सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

हिंदू धर्म में सावन के महीने का बहुत महत्व है. श्रावण मास में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है. इसे मनोकामनाओं को पूरा करने का महीना भी कहा जाता है. श्रावण मास को वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की भी परंपरा है.

श्रावण मास की शुरूआत

इस बार श्रावण मास की शुरूआत 6 जुलाई से हो चुकी है और इसका समापन 3 अगस्त को होगा. इस बार श्रावण मास पर अद्भुत संयोग बन रहा है क्योंकि सावन की शुरूआत का पहला दिन ही सोमवार है, वहीं सावन के अंतिम दिन यानी 3 अगस्त को भी सोमवार का ही दिन है.

श्रावण मास के सोमवार का महत्व

सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का बहुत महत्व माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार जो भी इस माह में सोमवार का व्रत करता है, भगवान शिव उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की कृपा से विवाह सम्बंधित सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं.

श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव और विष्णु का आशीर्वाद लेकर आता है. माना जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे श्रावण मास में कठोरतप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था

श्रावण में शिव पूजन का महत्व

सोमवार का दिन शिवजी की पूजा के लिए खास माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार सावन के सोमवार पर शिवलिंग की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं.

श्रावण मास में दूर करें दांपत्य जीवन की समस्याएं

-दांपत्य जीवन की खटास दूर करने के लिए पति-पत्नी को मिलकर पूरे श्रावण मास दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्थात पंचामृत से भगवान शिव शंकर का अभिषेक करना चाहिए.

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