माता-पिता का आशीर्वाद सबसे बड़ा सौभाग्य, घर का आचरण देवत्व के अनुरूप होना चाहिए : पं. विपिन बिहारी महाराज
श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर पारिवारिक संस्कार, माता-पिता के सम्मान और नारी गरिमा का दिया संदेश, विशाल भंडारे के साथ सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ संपन्न
गोटेगांव। श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के समापन अवसर पर गुरुवार, 5 नवंबर को कथाव्यास पं. विपिन बिहारी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पारिवारिक संस्कार, माता-पिता के सम्मान, वाणी की मर्यादा और नारी गरिमा का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि घर का आचरण देवत्व के अनुरूप होना चाहिए। जिस पुत्र के सिर पर माता-पिता के आशीर्वाद का हाथ है, वह संसार का सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति है।
कथा प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने कहा कि घर में होली की अग्नि प्रज्वलित होनी चाहिए, लेकिन कड़वी वाणी की अग्नि कभी नहीं जलनी चाहिए। कटु शब्द परिवार की मधुरता और आपसी प्रेम को समाप्त कर देते हैं। प्रत्येक परिवार का जुड़ाव किसी संत, महापुरुष अथवा सद्विचारों से होना चाहिए। सत्संग और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े परिवार में नैतिक एवं संस्कारों का पतन नहीं होता।
माता-पिता का अपमान करने वाला व्यक्ति वास्तविक दिव्यत्व प्राप्त नहीं कर सकता
स्त्री सम्मान और पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए पं. विपिन बिहारी महाराज ने कहा कि जिस घर में मां, पत्नी और पुत्री का सम्मान होता है, वहां ईश्वर की कृपा बनी रहती है। जिस परिवार की महिलाएं दुखी रहती हैं, उसका वास्तविक विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मां शब्द भले ही छोटा है, लेकिन उसका अर्थ संसार में सबसे बड़ा है।
महाराज श्री ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग घरों में मां के नाम की पट्टिकाएं तो लगाते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में उन्हीं माता-पिता को वृद्धाश्रम छोड़ देते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। माता-पिता का अपमान करने वाला व्यक्ति कभी वास्तविक दिव्यत्व प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने बेटों से आह्वान किया कि यदि उनसे माता-पिता के प्रति कोई भूल हुई है तो उनके चरणों में बैठकर क्षमा मांगें और जीवनभर उनके प्रति सम्मान, सेवा एवं विनम्रता का भाव रखें।
जीवन के वास्तविक सत्य पर चिंतन करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि पशुओं के बच्चों की आंखें जन्म के कुछ समय बाद ही खुल जाती हैं, लेकिन मनुष्य की आंखें जीवनभर नहीं खुलतीं। मनुष्य सांसारिक मोह और अहंकार में उलझकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
मंत्रियों सहित जनप्रतिनिधियों ने किया कथा श्रवण
मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन एवं यजमान परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के समापन अवसर पर मणिनागेंद्र सिंह सैनिक स्कूल परिसर में प्रातः हवन एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात आयोजित कथा प्रवचन में मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र पटेल, वंडा विधायक वीरेंद्र सिंह, अभिराज सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्य यजमान एवं वरिष्ठ समाजसेवी श्री मुलाम सिंह पटेल की विशेष उपस्थिति रही।
सेवा सहयोगियों का सम्मान, विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
सप्ताहभर चले धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले पुलिस प्रशासन, जनपद पंचायत, नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत मंडल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का यजमान परिवार की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। आयोजन समिति ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी लोगों के योगदान की सराहना की।
समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। यजमान परिवार की ओर से पूर्व राज्यमंत्री श्री जालम सिंह पटेल एवं मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन के सचिव श्री सरदार सिंह पटेल ने संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण, भक्ति और सेवा के भाव के साथ संपन्न हुआ।
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