हरि नाम के स्मरण और सद्कर्मों से ही सार्थक होता है मानव जीवन : पं. विपिन बिहारी जी महाराज
श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल सहित जनप्रतिनिधियों ने किया व्यासपीठ पूजन, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने ऑडियो संदेश से दिया आशीर्वाद
गोटेगांव। श्रीधाम नगर में मणिनागेंद्र सिंह सैनिक स्कूल के समीप आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा श्रवण के लिए विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूज्य कथाव्यास एवं गौपीठाधीश्वर पंडित विपिन बिहारी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए मानव जीवन की सार्थकता, भक्ति, सदाचार, सत्संग और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
महाराज श्री ने कहा कि हरि नाम का स्मरण, ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, समर्पण और सद्कर्म ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं। केवल वेद-पुराणों का ज्ञान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को अपने आचरण और व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है। जब मनुष्य के हृदय में भगवान के नाम के प्रति अनुराग और भक्ति का भाव जागृत होता है, तभी उसका जीवन वास्तविक अर्थों में सफल होता है। उन्होंने हरि नाम को बीज की संज्ञा देते हुए कहा कि जिस प्रकार बीज को उचित देखभाल और सिंचाई से वृक्ष का स्वरूप मिलता है, उसी प्रकार भक्ति और समर्पण से सींचा गया हरि नाम मनुष्य के जीवन में सद्संस्कार, पुण्य और सदाचार के रूप में फलित होता है।
मध्यप्रदेश की धरती की आध्यात्मिक महत्ता पर डाला प्रकाश
महाराज श्री ने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मध्यभारत की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान की लीलाओं और उनकी कृपा से जुड़ी हुई पावन भूमि है। भगवान की लीलाओं के दौरान संकट के क्षणों में मध्यभारत की धरती ने उन्हें आश्रय और सेवा प्रदान की। इस भूमि का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है।
सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव को धर्म की मूल भावना के विपरीत बताया। महाराज श्री ने कहा कि प्रकृति सभी का समान भाव से पालन-पोषण करती है। सूर्य का प्रकाश, वायु और जल किसी के साथ भेदभाव नहीं करते, इसलिए मनुष्य को भी संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर सभी के कल्याण की भावना अपनानी चाहिए। धर्म का वास्तविक उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव, समानता और मानवता की स्थापना करना है।
संगति से निर्धारित होता है मनुष्य का चरित्र और भविष्य
कथा के दौरान पंडित विपिन बिहारी जी महाराज ने सत्संग और अच्छी संगति के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का व्यक्तित्व और चरित्र उसकी संगति से प्रभावित होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव ऐसे लोगों के संपर्क में रहना चाहिए, जिनके विचार, व्यवहार और कर्म सकारात्मक हों। शराब सेवन, गाली-गलौज और अनुचित आचरण करने वाले लोगों की संगति से दूर रहना चाहिए, क्योंकि अच्छी संगति व्यक्ति को उन्नति की ओर ले जाती है, जबकि बुरी संगति उसके पतन का कारण बन सकती है।
महाभारत और राजा परीक्षित से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से महाराज श्री ने धर्म, सत्य और ईश्वर के प्रति अटूट निष्ठा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और विजय केवल संख्या बल या बाहरी सामर्थ्य पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सत्य, धर्म और ईश्वर के प्रति विश्वास सबसे बड़ी शक्ति है। महाभारत में कौरवों के पास विशाल सेना और अधिक संसाधन होने के बावजूद पांडवों की विजय इस बात का प्रमाण है कि जहां धर्म और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद होता है, अंततः विजय भी वहीं प्राप्त होती है।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल सहित जनप्रतिनिधियों ने किया व्यासपीठ पूजन
श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में पहुंचकर व्यासपीठ का पूजन किया और पूज्य महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन के सचिव एवं वरिष्ठ यजमान इंजीनियर सरदार सिंह पटेल, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल (मुन्ना भैया) तथा श्रीमती सुमनलता पटेल ने सहयोगी यजमानों के साथ विधिवत व्यासपीठ पूजन किया।
जबलपुर से पधारी राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकि, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते तथा मुख्य यजमान मुलायम सिंह पटेल (भैयाजी) ने भी व्यासपीठ पर पूजन-अर्चन कर कथाव्यास पंडित विपिन बिहारी जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति से आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का ऑडियो संदेश बना विशेष आकर्षण
इस धार्मिक आयोजन में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का ऑडियो संदेश श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया तथा यजमान परिवार को इस पुनीत धार्मिक आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए अपना आशीर्वाद प्रेषित किया। शंकराचार्य जी के संदेश के प्रसारण से धर्मसभा में विशेष आध्यात्मिक आत्मीयता और उत्साह का वातावरण निर्मित हुआ।
उल्लेखनीय है कि कीर्तिशेष श्री मणिनागेंद्र सिंह पटेल एवं पूज्य श्रीमती यशोदाबाई पटेल की पावन स्मृति में मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन कराया जा रहा है। यह धार्मिक आयोजन 30 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 5 नवंबर तक चलेगा। आयोजन के प्रथम दिवस मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कथा में सहभागिता की थी तथा व्यासपीठ पर प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर उन्नति की कामना करते हुए प्रार्थना समर्पित की थी।
भजन-कीर्तन और कथा श्रवण से भक्तिमय हुआ वातावरण
कथा के तृतीय दिवस विशाल पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भजन, संकीर्तन और कथाव्यास के मुखारविंद से प्रवाहित भागवत कथा की अमृतधारा से संपूर्ण आयोजन स्थल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं में कथा के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला।
आयोजन को व्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता निरंतर जुटे हुए हैं। फाउंडेशन के सचिव इंजीनियर सरदार सिंह पटेल, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल तथा गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में पहुंचकर धर्मलाभ अर्जित करने की अपील की है। 5 नवंबर तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण करने का अवसर मिलेगा।



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