बालाघाट में 400 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का प्रस्ताव, सड़क-स्वास्थ्य और पेयजल पर रहेगा फोकस
NE18-बालाघाट। आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 400 करोड़ रुपये से अधिक की विकास कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, पोषण और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े करीब 1500 कार्य प्रस्तावित हैं। राज्य शासन द्वारा तैयार विकास योजना का खाका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखा जाएगा।
योजना के तहत बालाघाट जिले के परसवाड़ा, बैहर, लांजी, बिरसा और किरनापुर विकासखंडों में विभिन्न विभागों के माध्यम से काम कराए जाएंगे। इन कार्यों के लिए विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा को दी गई है।
सड़कों पर खर्च होंगे 268.94 करोड़
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से सबसे अधिक राशि सड़क निर्माण पर खर्च की जाएगी। पांचों विकासखंडों में 151 सड़क एवं सीसी रोड निर्माण के लिए 268.94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 69 पुलिया एवं कल्वर्ट निर्माण पर 34.02 करोड़ और 60 स्टॉप डैम के निर्माण पर 35.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
20 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे विकसित
आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाने की योजना है। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का निर्माण किया जाएगा। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की निर्बाध उपलब्धता के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना प्रस्तावित है। स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े निर्माण कार्यों के लिए करीब 3.11 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।
कुपोषण प्रभावित गांवों पर विशेष ध्यान
डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद इन क्षेत्रों में विशेष फोकस किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इन गांवों में सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है।
पेयजल और राशन व्यवस्था भी होगी मजबूत
पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं, जिन गांवों में निर्धारित मापदंडों के अनुसार नल-जल योजना संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अलावा अनाज वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राशन दुकानों और गोदामों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिस पर करीब 6.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। राज्य सरकार का दावा है कि 13 विभागों के समन्वय से तैयार यह कार्ययोजना जिले के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक सड़क, स्वास्थ्य, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बेहतर करने में मदद करेगी।
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