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अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़कर सही दिशा में सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं - धर्मेंद्र सिंह लोधी


(मोहन सिंह राजपूत) नरसिंहपुर/गोटेगांव:-
स्थानीय सरस्वती शिक्षा परिषद म.प्र. महाकौशल प्रांत जबलपुर द्वारा आयोजित सामान्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर में किया गया। प्रशिक्षण वर्ग के संवाद सत्र में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश शासन के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग तथा जबेरा विधानसभा के विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी उपस्थित रहे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और पारिवारिक मूल्यों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
अपने संबोधन में मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर ही सशक्त एवं संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती केवल शिक्षा देने का कार्य नहीं करती, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों एवं संस्कारों पर आधारित शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में जन्मदिवस दीप प्रज्ज्वलन एवं इष्ट देव के पूजन के साथ मनाने की परंपरा रही है, जबकि पाश्चात्य संस्कृति में मोमबत्ती बुझाने की परंपरा अंधकार का प्रतीक है। उन्होंने “ॐ असतो मा ज्योतिर्गमय” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकाश एवं ज्ञान की ओर ले जाने का संदेश देती है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जुड़ावन सिंह ठाकुर ने “कुटुंब प्रबोधन” विषय पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि पंचकोशीय विकास की अवधारणा की तरह समाज कल्याण के लिए “पंच परिवर्तन” आवश्यक है। इसके अंतर्गत स्व का बोध, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य पालन जैसे विषय समाज एवं राष्ट्र निर्माण के आधार हैं। उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना ही विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने महाराणा प्रताप के दूत का प्रसंग सुनाते हुए “स्व का बोध” समझाया। उन्होंने बताया कि जब अकबर के दरबार में दूत से सिर झुकाने को कहा गया तो उसने उत्तर दिया कि “इस सिर पर मेवाड़ की पगड़ी रखी हुई है, यह सिर किसी के सामने नहीं झुकेगा।” इस प्रसंग को आत्मसम्मान एवं राष्ट्र गौरव का प्रतीक बताया गया।
संवाद सत्र में परिवार एवं कुटुंब के अंतर को भी समझाया गया। कुटुंब प्रबोधन के छह आयाम—भोजन, भजन, भवन, भेष, भूषा एवं भ्रमण—पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को संस्कारित भोजन, नियमित पूजा-पाठ, भारतीय परंपराओं एवं सादगीपूर्ण जीवन शैली का महत्व समझाना आवश्यक है। जन्मदिन एवं विवाह जैसे संस्कारों को भारतीय वैदिक परंपराओं के अनुसार सादगी और आध्यात्मिकता के साथ मनाने पर भी जोर दिया गया।
भवन की भारतीय पहचान को लेकर वक्ताओं ने कहा कि घरों में तुलसी का पौधा, स्वास्तिक, शुभ-लाभ, ओम जैसे भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का होना सांस्कृतिक चेतना का परिचायक है। वहीं भ्रमण के संदर्भ में धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के दर्शन को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
कार्यक्रम में हरिराम तिवारी प्रांत प्रमुख नगरीय शिक्षा महाकौशल प्रांत, रविशंकर शुक्ल प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख, शिवानंद सिन्हा वर्ग संयोजक, राजकुमार जैन जिला सचिव सरस्वती शिक्षा परिषद नरसिंहपुर, राम बहोरी पटेल क्षेत्र संयोजक प्रारंभिक शिक्षा, रवि मिश्रा विभाग समन्वयक रीवा, राम शिरोमणि विभाग समन्वयक शहडोल, मनोज गोस्वामी विभाग समन्वयक मंडला-छिंदवाड़ा, कमलेश अग्रहरि विभाग समन्वयक जबलपुर, पुष्पेंद्र परमार प्रांत घोष प्रमुख, शिवनारायण शर्मा प्रांत घोष प्रमुख ग्रामीण शिक्षा, बालकृष्ण शर्मा प्रांत संगीत प्रमुख एवं विजय साहू प्रांत संयोजक शारीरिक शिक्षा सहित बड़ी संख्या में शिक्षार्थी, आचार्य एवं दीदियां उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन राजकुमार ठाकुर विभाग समन्वयक छतरपुर विभाग ने किया। स्वागत उद्बोधन स्थानीय विद्यालय के व्यवस्थापक एवं जिला सचिव राजकुमार जैन, विभाग समन्वयक कमलेश अग्रहरि तथा विद्यालय के प्राचार्य नर्मदा प्रसाद गुप्ता द्वारा किया गया।

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